नई दिशा

में आपका स्वागत है। नमस्ते ✍️यह ब्लॉग कविताओं, लेख एवं विभिन्न प्रकार के सुविचारों से समाहित है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है की यह मेरा ब्लॉग लोगों की जागरूकता एवं उज्जवल भविष्य के लिए उचित सिद्ध होगा।

कुमार देवेंद्र

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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

अनकही माफ़ियाँ

कैसे करूंँ पश्चाताप ?

हर कण में है ग्लानी की छाप। 

कुछ नादान था कुछ अभिमान, 

जब नहीं किया था आपका सम्मान। 

कल था आप के प्रतिकूल ,

आज हूंँ आपके अनुकूल ।

कृपादृष्टि आपकी, योगदान आपका ।

एक दिन मंजिल पाएगा शिष्य  आपका।। 

आहोश में था उस रोज मैं। 

 पश्चाताप के आंँसुओं से आज फिर रोया हूं मैं।। 

जब मैंने बात का उल्लंघन किया होगा! 

आत्मा में कैसा मंथन हुआ होगा ?

भूल गया था कर्तव्य, 

शायद इसीलिए नहीं पहुंच पाया गंतव्य। 

तेवर भी छूट गए दुनियादारी भी छोड़ दी। 

खुद को ना बदल सका पर सोच ही बदल ।।

मार्ग भटका, फिर अटका !

अभिमान रूपी फूटा मेरा मेरा मटका।

 जो पथ दिखाया आपने ,

वह आज भी याद है ।

प्रतिपल प्रतिक्षण अनुसरण करूं

 यही रब से फरियाद है ।।

आज भी देखता हूंँ सपनें नैयनो के आकाश में। 

रहमत है आपकी मुझ पर ,

तभी तो हूं फर्श से अर्श पर।।

 मैं मूर्ख था ,मैं धूर्त था।

 मुझे एहसास हुआ, आभास हुआ।

जब परखने का प्रयास किया

मेहरबानियांँ  आपकी,  कदरदानियांँ आपकी।

 करुणा भी याद है महिमा भी याद है आपकी।। 

जो दिया जलाया आपने, 

उसे कौन सी बयार बुझाएगी ?

भाग्य ही बदल दिया आपने,

कौन सी हस्तरेखा रोक पाएगी?


            कुमार  देवेंद्र

            'सितार ए हिन्द'

द्वारा स्वरचित मौलिक रचना  प्रिय शिक्षक को समर्पित। 


रविवार, 27 सितंबर 2020

अमूल्य सहयोग

मेहरबानियांँ आपकी।
कदरदानियां आपकी।
दरोमदार बना दिया मुझे, 
किस काबिल था उस दिन मैं ?
जीवन पथ पर चला दिया मुझे।
आपके विचारों को लेकर धैर्यवान बन गया हूं मैं।
एक दिन  आपको भी गर्व होगा ।
जब माथे पर विजय तिलक लगा होगा ।।
क्या हैसियत थी उस रोज मेरी?
जब मुझे सहारा मिला आपका,
कौन कहता है मैं दूर हूंँ? 
कैसे कहूं कि मैं कितना करीब हूँ!
लोग उंगली पकड़कर चलाना  सिखाते आए हैं।
मेरे सर पर तो आपने पूरा हाथ रख दिया।
आपके गुणधर्म को पाया।
यह मेरा सौभाग्य है ।
आपका सानिध्य पाकर हुनर में माहिर हो गया हूंँ। 
आज कुछ सदकार्यों के लिए जाहिर हो गया हूँ।  
विफलता ही सफलता के पट खोलती है।
यह आपने बताया मुझे,
अनुसरण करूंगा उस पथ का !
जो आप ने दिखाया मुझे।
मैं मेरी व्याकुलता समझकर, संवेदना पारख कर , जिज्ञासा पूर्ण कर।।
वाणी में मधुरता भर दिया आपने। 
जीवन के कटु सत्यता एहसास करा दिया।
ममता, करुणा, धैर्य, त्याग से भरा प्यार आपका प्यार। 
आपसे दूर कैसा मेरा संसार।
याद आती है आपकी बारंबार।।
                                            कुमार देवेंद्र 
                                         'सितार-ए-हिंद'

शनिवार, 5 सितंबर 2020

Poem on occasion of Teacher's Day


राष्ट्र निर्माताओं को शत शत नमन।
आप ही ने दिया जीने का जतन।।
यह पावन पर्व मुबारक हो।
भविष्य संवारक आप हो ।।
कर्म पथ दिखाने वाले,
 सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले।
 शिष्य का अभिवादन स्वीकार करें।
नई पीढ़ी को सच्चा ज्ञान देकर 
वतन पर आभार करें ।
आप ज्ञान की बयार हैं।
 कलम जिनका हथियार है।।
 शिक्षक को परिभाषित करना ,
इतना आसान नहीं है।
राही बने उस राह के जो दिखाया आपने,
 इससे बड़ा कोई अरमान नहीं है।।
नवकलियों में ज्ञान रस भर दिया आपने।
हम अबोध बालकों को,
 जीवन जीने की कला सिखा दिया आपने।।
    
      ---कुमार देवेंद्र 

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

जीवन के पल

 आधी जिंदगी गुजार दी सो - सो कर।
 तो गुजरेगी आधी रो-रोकर।।
 जीना है हमें हंँस-हंँसकर।
 हर पल मुस्कान रहे चेहरे पर,
मेरा लक्ष्य मुझे पागल बनाता है।
 आज मुंतशिर पड़ा हूंँ।
फिर भी पैरों पर खड़ा हूंँ।।
 जहान में जितनी मुसीबतें नहीं।
लड़ने की उतनी आदतें हैं।।
 मंजिलें बनी है तो रास्ते भी होंगें।
गलतियां होंगी ,तो सुधार भी होंगे।।

सोमवार, 13 जुलाई 2020

लक्ष्य

कृषक बैठा, 
पावस की घटा की आस में ।
मेरा जीवन-लक्ष्य  बैठा, 
आखिरी साँस में।। 
कर्तव्यपरायणता सिध्दांत मेरा, 
हर निशा के बाद आता है सवेरा।
समय मेरा परम मित्र। 
हर पल दिखलाता,
जीवन  नव चित्र।  
जग के पीछे क्यों भागू?
जब कर लिया, 
सत्मार्ग का नियम लागू। 
सहानुभूति सबके लिए। 
नव पथ अपने लिए।। 


इंसान और वक्त

इंसान को वक्त कितना कुछ सिखा गया? 
जब सर पर मजबूरियाँ पड़ी, 
तो कहाँ से कहाँ आ गया। 
रहमत है खुदा की मुझ पर। 
तभी तो हूँ फर्श से अर्श पर।। 
जीवन की राहों में कितनी मोड़ है ।
सबको मंजिल पाने की होड़ है।। 
अमूल्य समय देता पैगाम। 
हासिल कर लो सही वक्त पर मुकाम ।।

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

मानवीय हिंसा

क्यों तेरे जहन में हिंसा समायी?
कितने मासूमों ने इसमें जान गवायी?
इस राष्ट्र के लहू की कणिकाएं,
बेबस निर्जन को है न्याय की आशाएँ।
कुछ दुर्जन हैं इस जहांँ में,
जो चलते हैं हिंसा के पथ में।।
ऐसा प्रतीत हो रहा,
कि मानवता शब्द इस दुनिया से मिट रहा।।
 ऐ जाते हुए लम्हों,
 कुछ मेरी भी सुन लो।
हिल मिलकर वास करो इस जग में,
तुझमें वो गुण नहीं जो है खग में।
प्रेम प्रीत की रीति अपना लो,
भोगी बनने से खुद को संभालो।
करुणा भाव से व्यक्तित्व तेरा निखरेगा,
तेरी समा को खुद ,खुदा रोशन करेगा।।
           
लिखने की शिकायत क्या करेंगे?
 जब लिखना मेरी फितरत है ।।
                  

कुमार देवेंद्र 'सितार - ए - हिंद' 



गुरुवार, 26 मार्च 2020

भविष्य के कर्णधार

हर बालक खुद में है फूल,
मत समझो इनको धूल।
परमात्मा की  ये रचनाएं।
भविष्य के लहू कि ये कणिकाएं।।
ये भिन्न- भिन्न पुष्प बनाएंगे बाग।
भिन्न-भिन्न धुन ही बनाती है राग।।
बदल लो अपना नजरिया,
नजारे खुद से बदलेंगे।
सत्मार्ग पर आप चलो,
ये आपका अनुसरण करेंगें।।
आंकलन करके ना कम करो अनुराग,
 जिएंगे बनकर चिराग ।।
 हौसला साथ हो ,आपका हाथ हो।
 तूफान का सीना चीरकर मंजिलें  ढूंढ लेंगे,
 मझधार को पार कर दरिया ढूंढ लेंगे।
 कितने सपने इनके नयनो  के आकाश में ?
कितनी आशाएं हैं इनके जीवन के विश्वास में?
बस इतना निवेदन है मेरा आपसे,
मत तुलना करो इनकी किसी खास से।।
                     ---   कुमार  देवेंद्र "सितार -ए-हिंद"


बुधवार, 25 मार्च 2020

रंग

ऐसे रंग बिखेर, 
कोई बदरंग ना हो।
होली का रंग है,
ना ही कोई जंग है।
शिक्षा अमन ,शांति के रंग बिखेरे।
आत्मनिर्भरता परिश्रम की उमंग हो।
घृणा निकालो स्वदेश प्रेम की भावना भरो।।
यह रंग ऐसे गगन को छूलें।
ज्ञान की झड़ी में मनुष्य यूं ही झूले।।
रंग खुशी के हर दिशा में उड़ें,
विनम्रता सादगी जैसे रत्न सब  में जड़ें।
रंग भरो इन राष्ट्र की नवकलियां पर ,
ये पुष्प ना चलेंगे हैवान के रास्ते पर।
भांग चरस मदिरा से नाता छोड़ो,
हिंसा और विडंबनाओं से मुंह मोड़ो।।

    कुमार देवेंद्र "सितार-ए- हिंद"



मंगलवार, 24 मार्च 2020

जिंदगी

                  

जीवन में परिश्रम से पीछे ना हटना ,
जिंदगी की दौड़ में हार मानकर ना रुकना।
जरूरी नहीं कि तू प्रत्येक दौड़ में मंजिल पाए।
जरूरी है कि तू प्रत्येकदौड़ में आए।।
अगर निरंतर मेहनत करेगा,
तो अवश्य अव्वल  आएगा।
कर्मवीर ही असंभव को संभव बनाते हैं।
जटिल राहों पर भी पथिक बनकर मंजिल पाते हैं।।
साहस धैर्य के साथ चलो,
कर्तव्यपरायणता पर विश्वास करो।
क्यों डगमगाते हो? नामुमकिन नाम सुनकर।
स्थिरता बनाए रखो मुश्किलें देखकर।।
जीवन सुख दुख का जोड़ा है,
हर रात के बाद दिन का सवेरा है।
क्यों कहते हो यह तेरा है वह मेरा है?
हर कण-कण में ईश्वर का बसेरा है।।
आशाओं के साथ पूर्ण विश्वास रखना। 
कुछ कर दिखाने का हक मेरा है।
इन जज्बातों को संजो कर रखना।
जीवन में परिश्रम से पीछे ना हटना।।

।                 कुमार देवेंद्र  सितार - ए - हिन्द


पाश्चात्य कला का प्रभाव।

   पाश्चात्य कला का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव

पाश्चात्य कला हमें कितना प्रभावित करने लगी?
हमारे मन में उन जैसा बनने की ज्वाला भड़कने लगी। 
क्या करोगे पूंजीवादी विचारधारा पर चलकर?
क्या पाओगे सारी दुनिया को हड़प कर ?
विदेशी संस्कृति, रंग - रूप अपना रहे।
भारतीय सभ्यता और संस्कृति बुला रहे।।
जब जाड़े से लोग मरे तो न्यू यीअर मनाएँ।
शोक दिवस पर वैलेंटाइन डे की धूम मचाएँ।।
मदर डे ,फादर डे, ग्रैंड फादर डे के दिन उनकी डीपी लगाएँ।
बाकी दिन उनका अपमान करके बी पी बढ़ाएँ।।
कब अपने पावन पर्व को याद करोगे ?
क्या अपने नव वर्षों ,दिवाली, ईद, बैसाखी का पतन करोगे?
सादा जीवन उच्च विचार सिद्धांत पर चलो।
राष्ट्र निर्माण के लिए कल्याणकारी पथ पर चलो।।
अंधविश्वास सामाजिक कुरीतियों विडंबनाओं का सामना करो।
अपनी परंपराओं संस्कृति पर अमल करो।
क्यों विदेशी रीति-रिवाजों को अपना कर खुद को उच्च दिखाते हो?
क्यों फैशन करके दूसरों जैसा बनना चाहते हो?
विदेशी आंधियाँ ऐसे चली कि स्वदेश प्रेम की आग पूछने लगी।
पाश्चात्य कला हमें प्रभावित करने लगी।।

                                       कुमार देवेंद्र       सितार -ए-हिन्द

      - -- --   जोश अपनी सभ्यता और संस्कृति लौटाने का ।।

शुक्रवार, 20 मार्च 2020

करोना विषाणु

                 करोना विषाणु संबंधित विचार


  •  जितना हो सके दूरियां बनाए रखो, इस करोना वायरस से खुद को बचाए रखो।                                                                                                                                                                                                                          अगर हम भारतीयों को कोरोना हो गया,
                      तो समझो भारत हमेशा की नींद में सो गया।


  •  असली देशभक्त वही होगा,
            जो कोरोना से बचा होगा।


  • यह कोरोना वायरस भी कितना स्वाभिमानी है?
          न बिन दिया जाता है और ना ही बिन दिये आता है,
           तो भाई क्यों मिलजुल कर खुद को और दूसरों को फंसाता आता है?


  •  हिंसा में औकात की बात करने वालों,
विषाणु की औकात से खुद को संभालो।।


  • जब चीन वाले क्रोना से मौत की नींद सो रहे थे,
तब भारत वाले खुश होकर चैन की नींद सो रहे थे।।

         किसी के पास ना आना जाना, 

         कहीं हो ना जाए अपना भी बेगाना ।।                                                              कुमार देवेंद्र

                                               "सितार- ए-हिन्द"
                                   

    



शुक्रवार, 6 मार्च 2020

बदलने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता की माप है।

          बदलने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता की माप है। 

परिवर्तन ही प्रकृति का शाश्वत नियम है। प्रत्येक प्राणी को समयानुसार अपनी आदतों पर बदलाव करना अति आवश्यक है। यदि समय पर बुरी आदत न बदली जाये तो बुरी आदत समय बदल देती है। हमारा परिवर्तन का एक कदम भी हमारा पूरा दृष्टिकोण बदल देगा। हमें अपनी बुरी आदतों को अच्छाइयों में परिवर्तित कर लेना चाहिए। 
 परिवर्तन से जीवन बदलने वालों के उदाहरण इस पाकर हैं - बदलाव से रत्नाकर जैसा डाकू भी प्रसिद्ध ऋषि बाल्मीकि बन गया तथा अद्वितीय ग्रंथ रामायण की रचना की। परिवर्तन से ही अंगुलिमाल जैसा हिंसक व्यक्ति भी सभ्य व्यक्ति बन गया। सम्राट अशोक ने भी कलिंग युद्ध में बहुत मानव संहार किया था ,केवल बदलाव से ही  सहानुभूति के पथ पर चलने लगा था। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया था परन्तु दृणसंकल्प तथा परिवर्तनशीलता से आज संपन्न देशों में से एक है। 
 जो जैसा सोंचता है वैसा ही करता है और वैसा ही बन जाता है। खुद को मजबूत सोंचने वाला व्यक्ति अपने आप को मजबूत बनता है जबकि कमजोर सोंचने वाला कमजोर बनता है।  सफलता पाने के लिए सर्वप्रथम हमें यह विश्वास करना होगा की हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा हमें सफलता के अनुकूल बनाना होगा।   हमें कामयाबी के पीछे नहीं भागना चाहिए बल्कि उसके काबिल बनना चाहिए।  
 जहाज बन्दरगाह में सुरछित रहतें है परन्तु जहाज बंदरगाह में खड़े रहने के लिए नहीं बनाये जातें हैं। परिवर्तन पर ही विकास  आधारित होता है।हमें नकारात्मक सोंच को सकारात्मक में परिवर्तित करना अतिआवश्यक है। 
     "हार मन लो तो हार होगी ,जीत थान लो तो  अवश्य जीत होगी " दुनिया की कोई भी शक्ति मनुष्य की क्षमता से बड़ी  नहीं है। 
    जैसे प्रत्येक साधु का भूत(बीता हुआ समय)  होता है वैसे ही प्रत्येक गुनहगार का भविष्य होता है। परिवर्तन से व्यक्ति धुल से सितारा बन जाता है। 

            ----- कुमार देवेंद्र  "सितार-ए -हिन्द "

सोमवार, 2 मार्च 2020

परिवर्तन की माप

परिवर्तन जिनका नारा हो वो आज हमारे साथ चले।  

निडर बढ़े ,निर्भीक लड़े सादगी  के पथ पर  चलें। 
परिवर्तन ही जीवन है , परिवर्तन ही जीवन की चाह ,
परिवर्तन ही दिखलाएगा सफलता की राह।  
बदलाव ने रत्नाकर डाकू को विद्वान ऋषि वाल्मीकि बना दिया।  
 परिवर्तन ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,चलें। 
अंगुलीमाल जैसे हिंसक को अहिंसा के पथ पर चला दिया। 
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध में बहुत मानव संहार किया। 
 परन्तु परिवर्तन से खुद को सहृदय  मनुष्य  बन गया। 
अमेरिका ने   द्वतीय  विश्व युद्ध में जापान में  परमाणु बम्ब गिरा दिया। 
परिवर्तनशीलता और लगनशीलता से  जापान ने खुद को संपन्न राष्ट्र बना लिया। 
परिवर्तन जिनका नारा हो वो आज हमारे साथ चलें ,
सादगी के आलम में सरिता संग नीर में बाह   चलें। | 
                               

                  प्रसिद्ध साहित्यकारों के अनुसार --------
                      अगर  बुरी आदत समय पर न बदली जाए तो बुरी आदत समय बदल देती हैं। 
                                              
           ------कुमार देवेन्द्र    'सितार -ए -हिन्द '

शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

लक्ष्य की प्राप्ति

मे री  उम्मीदों  में  पानी फिर  गया ,
जागकर आया था फिर सो गया |
कितने सपने देखे थे मैंने ?
कितना हँसता -  खेलता  था मैं  बचपन में |
मुझे दुनिया के सामने  रोना पड़ गया |
किसकी मेरे बचपन पर पड़ी नजर ?
मेरा  ऊपर वाले ने सब कुछ  छीन लिया |
दुनिया मुझसे छूट गयी पर तू क्यों मुझसे रूठ गया?
जो सपनों में भी न देखा वो आज सामने आया।
सामने देखकर बाधाएं मैं आज घबरा गया ,
पर बाधाओं  से लड़ने का विचार आ गया  |
फिर मैंने 'कठिन परिश्रम' करने का प्राण ठाना |
'कर्त्तव्य' करके इस दुनिया को कुछ है दिखलाना |
'मेहनत' और 'लगनशीलता ' ने क्या से क्या  बना डाला |
  इन शब्दों  मैंने अपने विचारों को को व्यक्त कर डाला |

        काँटों पर चलने वाले जल्दी मंजिल पाते  हैं ,
         क्योंकि काँटे चलने की रफ़्तार बढ़ा देते हैं           ---कुमार देवेंद्र     "सितार- ए- हिंद"