पाश्चात्य कला का भारतीय संस्कृति पर प्रभाव
पाश्चात्य कला हमें कितना प्रभावित करने लगी?
हमारे मन में उन जैसा बनने की ज्वाला भड़कने लगी।
क्या करोगे पूंजीवादी विचारधारा पर चलकर?
क्या पाओगे सारी दुनिया को हड़प कर ?
विदेशी संस्कृति, रंग - रूप अपना रहे।
भारतीय सभ्यता और संस्कृति बुला रहे।।
जब जाड़े से लोग मरे तो न्यू यीअर मनाएँ।
शोक दिवस पर वैलेंटाइन डे की धूम मचाएँ।।
मदर डे ,फादर डे, ग्रैंड फादर डे के दिन उनकी डीपी लगाएँ।
बाकी दिन उनका अपमान करके बी पी बढ़ाएँ।।
कब अपने पावन पर्व को याद करोगे ?
क्या अपने नव वर्षों ,दिवाली, ईद, बैसाखी का पतन करोगे?
सादा जीवन उच्च विचार सिद्धांत पर चलो।
राष्ट्र निर्माण के लिए कल्याणकारी पथ पर चलो।।
अंधविश्वास सामाजिक कुरीतियों विडंबनाओं का सामना करो।
अपनी परंपराओं संस्कृति पर अमल करो।
क्यों विदेशी रीति-रिवाजों को अपना कर खुद को उच्च दिखाते हो?
क्यों फैशन करके दूसरों जैसा बनना चाहते हो?
विदेशी आंधियाँ ऐसे चली कि स्वदेश प्रेम की आग पूछने लगी।
पाश्चात्य कला हमें प्रभावित करने लगी।।