मेहरबानियांँ आपकी।
कदरदानियां आपकी।
दरोमदार बना दिया मुझे,
किस काबिल था उस दिन मैं ?
जीवन पथ पर चला दिया मुझे।
आपके विचारों को लेकर धैर्यवान बन गया हूं मैं।
एक दिन आपको भी गर्व होगा ।
जब माथे पर विजय तिलक लगा होगा ।।
क्या हैसियत थी उस रोज मेरी?
जब मुझे सहारा मिला आपका,
कौन कहता है मैं दूर हूंँ?
कैसे कहूं कि मैं कितना करीब हूँ!
लोग उंगली पकड़कर चलाना सिखाते आए हैं।
मेरे सर पर तो आपने पूरा हाथ रख दिया।
आपके गुणधर्म को पाया।
यह मेरा सौभाग्य है ।
आपका सानिध्य पाकर हुनर में माहिर हो गया हूंँ।
आज कुछ सदकार्यों के लिए जाहिर हो गया हूँ।
विफलता ही सफलता के पट खोलती है।
यह आपने बताया मुझे,
अनुसरण करूंगा उस पथ का !
जो आप ने दिखाया मुझे।
मैं मेरी व्याकुलता समझकर, संवेदना पारख कर , जिज्ञासा पूर्ण कर।।
वाणी में मधुरता भर दिया आपने।
जीवन के कटु सत्यता एहसास करा दिया।
ममता, करुणा, धैर्य, त्याग से भरा प्यार आपका प्यार।
आपसे दूर कैसा मेरा संसार।
याद आती है आपकी बारंबार।।
कुमार देवेंद्र
'सितार-ए-हिंद'