बदलने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता की माप है।
परिवर्तन ही प्रकृति का शाश्वत नियम है। प्रत्येक प्राणी को समयानुसार अपनी आदतों पर बदलाव करना अति आवश्यक है। यदि समय पर बुरी आदत न बदली जाये तो बुरी आदत समय बदल देती है। हमारा परिवर्तन का एक कदम भी हमारा पूरा दृष्टिकोण बदल देगा। हमें अपनी बुरी आदतों को अच्छाइयों में परिवर्तित कर लेना चाहिए।
परिवर्तन से जीवन बदलने वालों के उदाहरण इस पाकर हैं - बदलाव से रत्नाकर जैसा डाकू भी प्रसिद्ध ऋषि बाल्मीकि बन गया तथा अद्वितीय ग्रंथ रामायण की रचना की। परिवर्तन से ही अंगुलिमाल जैसा हिंसक व्यक्ति भी सभ्य व्यक्ति बन गया। सम्राट अशोक ने भी कलिंग युद्ध में बहुत मानव संहार किया था ,केवल बदलाव से ही सहानुभूति के पथ पर चलने लगा था। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गया था परन्तु दृणसंकल्प तथा परिवर्तनशीलता से आज संपन्न देशों में से एक है।
जो जैसा सोंचता है वैसा ही करता है और वैसा ही बन जाता है। खुद को मजबूत सोंचने वाला व्यक्ति अपने आप को मजबूत बनता है जबकि कमजोर सोंचने वाला कमजोर बनता है। सफलता पाने के लिए सर्वप्रथम हमें यह विश्वास करना होगा की हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं तथा हमें सफलता के अनुकूल बनाना होगा। हमें कामयाबी के पीछे नहीं भागना चाहिए बल्कि उसके काबिल बनना चाहिए।
जहाज बन्दरगाह में सुरछित रहतें है परन्तु जहाज बंदरगाह में खड़े रहने के लिए नहीं बनाये जातें हैं। परिवर्तन पर ही विकास आधारित होता है।हमें नकारात्मक सोंच को सकारात्मक में परिवर्तित करना अतिआवश्यक है।
"हार मन लो तो हार होगी ,जीत थान लो तो अवश्य जीत होगी " दुनिया की कोई भी शक्ति मनुष्य की क्षमता से बड़ी नहीं है।
जैसे प्रत्येक साधु का भूत(बीता हुआ समय) होता है वैसे ही प्रत्येक गुनहगार का भविष्य होता है। परिवर्तन से व्यक्ति धुल से सितारा बन जाता है।