में आपका स्वागत है। नमस्ते ✍️यह ब्लॉग कविताओं, लेख एवं विभिन्न प्रकार के सुविचारों से समाहित है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है की यह मेरा ब्लॉग लोगों की जागरूकता एवं उज्जवल भविष्य के लिए उचित सिद्ध होगा।

कुमार देवेंद्र

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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2020

मानवीय हिंसा

क्यों तेरे जहन में हिंसा समायी?
कितने मासूमों ने इसमें जान गवायी?
इस राष्ट्र के लहू की कणिकाएं,
बेबस निर्जन को है न्याय की आशाएँ।
कुछ दुर्जन हैं इस जहांँ में,
जो चलते हैं हिंसा के पथ में।।
ऐसा प्रतीत हो रहा,
कि मानवता शब्द इस दुनिया से मिट रहा।।
 ऐ जाते हुए लम्हों,
 कुछ मेरी भी सुन लो।
हिल मिलकर वास करो इस जग में,
तुझमें वो गुण नहीं जो है खग में।
प्रेम प्रीत की रीति अपना लो,
भोगी बनने से खुद को संभालो।
करुणा भाव से व्यक्तित्व तेरा निखरेगा,
तेरी समा को खुद ,खुदा रोशन करेगा।।
           
लिखने की शिकायत क्या करेंगे?
 जब लिखना मेरी फितरत है ।।
                  

कुमार देवेंद्र 'सितार - ए - हिंद'