ऐसे रंग बिखेर,
कोई बदरंग ना हो।
होली का रंग है,
ना ही कोई जंग है।
शिक्षा अमन ,शांति के रंग बिखेरे।
आत्मनिर्भरता परिश्रम की उमंग हो।
घृणा निकालो स्वदेश प्रेम की भावना भरो।।
यह रंग ऐसे गगन को छूलें।
ज्ञान की झड़ी में मनुष्य यूं ही झूले।।
रंग खुशी के हर दिशा में उड़ें,
विनम्रता सादगी जैसे रत्न सब में जड़ें।
रंग भरो इन राष्ट्र की नवकलियां पर ,
ये पुष्प ना चलेंगे हैवान के रास्ते पर।
भांग चरस मदिरा से नाता छोड़ो,
हिंसा और विडंबनाओं से मुंह मोड़ो।।
कोई बदरंग ना हो।
होली का रंग है,
ना ही कोई जंग है।
शिक्षा अमन ,शांति के रंग बिखेरे।
आत्मनिर्भरता परिश्रम की उमंग हो।
घृणा निकालो स्वदेश प्रेम की भावना भरो।।
यह रंग ऐसे गगन को छूलें।
ज्ञान की झड़ी में मनुष्य यूं ही झूले।।
रंग खुशी के हर दिशा में उड़ें,
विनम्रता सादगी जैसे रत्न सब में जड़ें।
रंग भरो इन राष्ट्र की नवकलियां पर ,
ये पुष्प ना चलेंगे हैवान के रास्ते पर।
भांग चरस मदिरा से नाता छोड़ो,
हिंसा और विडंबनाओं से मुंह मोड़ो।।