कृषक बैठा,
पावस की घटा की आस में ।
मेरा जीवन-लक्ष्य बैठा,
आखिरी साँस में।।
कर्तव्यपरायणता सिध्दांत मेरा,
हर निशा के बाद आता है सवेरा।
समय मेरा परम मित्र।
हर पल दिखलाता,
जीवन नव चित्र।
जग के पीछे क्यों भागू?
जब कर लिया,
सत्मार्ग का नियम लागू।
सहानुभूति सबके लिए।
नव पथ अपने लिए।।