हर बालक खुद में है फूल,
मत समझो इनको धूल।
परमात्मा की ये रचनाएं।
भविष्य के लहू कि ये कणिकाएं।।
ये भिन्न- भिन्न पुष्प बनाएंगे बाग।
भिन्न-भिन्न धुन ही बनाती है राग।।
बदल लो अपना नजरिया,
नजारे खुद से बदलेंगे।
सत्मार्ग पर आप चलो,
ये आपका अनुसरण करेंगें।।
आंकलन करके ना कम करो अनुराग,
जिएंगे बनकर चिराग ।।
हौसला साथ हो ,आपका हाथ हो।
तूफान का सीना चीरकर मंजिलें ढूंढ लेंगे,
मझधार को पार कर दरिया ढूंढ लेंगे।
कितने सपने इनके नयनो के आकाश में ?
कितनी आशाएं हैं इनके जीवन के विश्वास में?
बस इतना निवेदन है मेरा आपसे,
मत तुलना करो इनकी किसी खास से।।
--- कुमार देवेंद्र "सितार -ए-हिंद"
मत समझो इनको धूल।
परमात्मा की ये रचनाएं।
भविष्य के लहू कि ये कणिकाएं।।
ये भिन्न- भिन्न पुष्प बनाएंगे बाग।
भिन्न-भिन्न धुन ही बनाती है राग।।
बदल लो अपना नजरिया,
नजारे खुद से बदलेंगे।
सत्मार्ग पर आप चलो,
ये आपका अनुसरण करेंगें।।
आंकलन करके ना कम करो अनुराग,
जिएंगे बनकर चिराग ।।
हौसला साथ हो ,आपका हाथ हो।
तूफान का सीना चीरकर मंजिलें ढूंढ लेंगे,
मझधार को पार कर दरिया ढूंढ लेंगे।
कितने सपने इनके नयनो के आकाश में ?
कितनी आशाएं हैं इनके जीवन के विश्वास में?
बस इतना निवेदन है मेरा आपसे,
मत तुलना करो इनकी किसी खास से।।
--- कुमार देवेंद्र "सितार -ए-हिंद"