मे री उम्मीदों में पानी फिर गया ,
जागकर आया था फिर सो गया |
कितने सपने देखे थे मैंने ?
कितना हँसता - खेलता था मैं बचपन में |
मुझे दुनिया के सामने रोना पड़ गया |
किसकी मेरे बचपन पर पड़ी नजर ?
मेरा ऊपर वाले ने सब कुछ छीन लिया |
दुनिया मुझसे छूट गयी पर तू क्यों मुझसे रूठ गया?
जो सपनों में भी न देखा वो आज सामने आया।
सामने देखकर बाधाएं मैं आज घबरा गया ,
पर बाधाओं से लड़ने का विचार आ गया |
फिर मैंने 'कठिन परिश्रम' करने का प्राण ठाना |
'कर्त्तव्य' करके इस दुनिया को कुछ है दिखलाना |
'मेहनत' और 'लगनशीलता ' ने क्या से क्या बना डाला |
इन शब्दों मैंने अपने विचारों को को व्यक्त कर डाला |
काँटों पर चलने वाले जल्दी मंजिल पाते हैं ,
क्योंकि काँटे चलने की रफ़्तार बढ़ा देते हैं ---कुमार देवेंद्र "सितार- ए- हिंद"
जागकर आया था फिर सो गया |
कितने सपने देखे थे मैंने ?
कितना हँसता - खेलता था मैं बचपन में |
मुझे दुनिया के सामने रोना पड़ गया |
किसकी मेरे बचपन पर पड़ी नजर ?
मेरा ऊपर वाले ने सब कुछ छीन लिया |
दुनिया मुझसे छूट गयी पर तू क्यों मुझसे रूठ गया?
जो सपनों में भी न देखा वो आज सामने आया।
सामने देखकर बाधाएं मैं आज घबरा गया ,
पर बाधाओं से लड़ने का विचार आ गया |
फिर मैंने 'कठिन परिश्रम' करने का प्राण ठाना |
'कर्त्तव्य' करके इस दुनिया को कुछ है दिखलाना |
'मेहनत' और 'लगनशीलता ' ने क्या से क्या बना डाला |
इन शब्दों मैंने अपने विचारों को को व्यक्त कर डाला |
काँटों पर चलने वाले जल्दी मंजिल पाते हैं ,
क्योंकि काँटे चलने की रफ़्तार बढ़ा देते हैं ---कुमार देवेंद्र "सितार- ए- हिंद"