में आपका स्वागत है। नमस्ते ✍️यह ब्लॉग कविताओं, लेख एवं विभिन्न प्रकार के सुविचारों से समाहित है। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है की यह मेरा ब्लॉग लोगों की जागरूकता एवं उज्जवल भविष्य के लिए उचित सिद्ध होगा।

कुमार देवेंद्र

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शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

लक्ष्य की प्राप्ति

मे री  उम्मीदों  में  पानी फिर  गया ,
जागकर आया था फिर सो गया |
कितने सपने देखे थे मैंने ?
कितना हँसता -  खेलता  था मैं  बचपन में |
मुझे दुनिया के सामने  रोना पड़ गया |
किसकी मेरे बचपन पर पड़ी नजर ?
मेरा  ऊपर वाले ने सब कुछ  छीन लिया |
दुनिया मुझसे छूट गयी पर तू क्यों मुझसे रूठ गया?
जो सपनों में भी न देखा वो आज सामने आया।
सामने देखकर बाधाएं मैं आज घबरा गया ,
पर बाधाओं  से लड़ने का विचार आ गया  |
फिर मैंने 'कठिन परिश्रम' करने का प्राण ठाना |
'कर्त्तव्य' करके इस दुनिया को कुछ है दिखलाना |
'मेहनत' और 'लगनशीलता ' ने क्या से क्या  बना डाला |
  इन शब्दों  मैंने अपने विचारों को को व्यक्त कर डाला |

        काँटों पर चलने वाले जल्दी मंजिल पाते  हैं ,
         क्योंकि काँटे चलने की रफ़्तार बढ़ा देते हैं           ---कुमार देवेंद्र     "सितार- ए- हिंद"